रिश्तों का संवाद
आदमी को नहीं पता कि नीचे उसकी जिंदगी में सांप है.. महिला को नहीं पता कि उस आदमी को कोई पत्थर कुचल रहा है.. महिला सोचती है:- “मैं गिरने वाली हूं.. और मैं चढ़ नहीं सकती क्योंकि सांप मुझे काटने वाला है.. आदमी थोड़ी और ताकत लगाकर मुझे ऊपर क्यों नहीं खींच लेता..।” आदमी सोचता है:- "मुझे बहुत दर्द हो रहा है.. फिर भी मैं तुम्हें जितना हो सके खींच रहा हूं.. तुम थोड़ा और जोर से चढ़ने की कोशिश क्यों नहीं करते..?" नैतिक बात यह है:- आप यह नहीं देख सकते कि दूसरा व्यक्ति किस दबाव में है, और दूसरा व्यक्ति वह दर्द नहीं देख सकता जिसमें आप है। आमतौर पर हम दूसरों की दशा को नज़रंदाज़ करने की भयंकर भूल कर जाते हैं और कभी कभी ये भूल जीवन भर का असहनीय दर्द दे जाती है। जब तक भूल का अहसास होता है तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है रिश्तों में। इस भूल का दंश जीवन भर पीड़ा देता है और इस पीड़ा के साथ ही जीवन निर्वाह करना पड़ता है। इसीलिए इस जीवन में एक-दूसरे को समय रहते ही समझने की कोशिश करनी चाहिए। अपने अहम या गलतफहमी में दूसरे की परिस्थिति, तकलीफ और दर्द को नज़रंदाज़ न करें।